45 Saal Ki Rita Chachi



Dilwala Rahul 2016-11-03 Comments

indian Sex Story

सभी देसी कहानी पढ़ने वाले दोस्तों और सहेलियों को दिलवाला राहुल का नमस्कार. मैं एक देहाती गाँव में रहता हूँ, गाँव में मेरा एक दोस्त रमेश भी रहता है. रमेश और मैं बचपन से ही बहुत अच्छे दोस्त हैं.

हमारी जोड़ी पुरे गाँव में जय-वीरू की जोड़ी के नाम से मशहूर है. रमेश के घर में केवल उसकी माँ रीता रहती है जिसे में चाची बुलाता हूँ, जिसकी उम्र 45 साल होगी, रमेश के पिताजी ने चाची को छोड़ दिया है और दूसरी शादी करके शहर में बस गए हैं.

रीता चाची के बारे में आपको शॉर्ट में बता दू. चाची दिखने में गोरी, मोटे और कसे हुए बदन वाली एक मर्दाना, कामुक, गाँव की देहाती औरत है जो साड़ी व ब्लाउज पहनती है.

चाची के उभरे हुए वक्ष और मोटे मोटे नितम्ब बहुत ही आकर्षक लगते हैं. चाची ब्लाउज इस तरीके से पहनती है कि उनकी संकरी-काली घाटी हर समय दिखाई देती है और कामोत्तेजना प्रकट करती है. यह कहानी आप देसी कहानी डॉट नेट पर पढ़ रहे है..

मेरी तो चाची को चोदने की इच्छा काफी पहले से थी परंतु रमेश के होते हुए यह सम्भव नही था. लेकिन एक दिन मेने टूटते हुए तारे से मन्नत मांगी और मेरी इच्छा पूरी हुयी. रमेश की फौज में नौकरी लग गयी और उसे गाँव से दूर सीमा में भेज दिया. अब घर में चाची अकेलीे रह गयी थी.

मेरे आवारापन के चलते मेरी नौकरी नही लग सकी तो मेरे पिताजी ने मुझे शहर में नौकरी करने का दबाव डाला तो मैने गाँव में ही खेती-बाड़ी करने का निर्णय लिया. क्योंकि मैं रीता चाची को ऐसे अकेला नहीं छोड़ सकता था.

दिन बीतते गए. एक दिन चाची खेत में घास काट रही थी और मैं भी हल चला रहा था. झुक कर घास काटने की वजह से चाची के आधे से ज्यादा वक्ष ब्लाउज से बहार आने को बेकाबू हुये जा रहे थे. ब्रा न पहनने के कारण चाची की चुच्चियों का उभार भी साफ़ साफ़ पता चल रहा था.

चाची घास काटे जा रही थी और उनके मम्मे हिले जा रहे थे और ये दृश्य देखकर मेरा लण्ड पैजामे में तंबू बन गया. कच्छा न पहनने की वजह से तंबू भी साफ़ साफ़ दिखाई दे रहा था. चाची ने साड़ी घुटनों के ऊपर तक उठायी हुयी थी जिसके कारण उनके गोरे मोटे पैर और मोटी जांघें दिख रही थीं और उनमें हलके हलके बाल भी थे. मैं चाची से बात करने लगा.

मैं- चाची, रमेश के न होने से बड़ा अकेलापन सा लग रहा है.

चाची- हाँ बेटा, तुझे क्या बताऊँ जब से वो गया है तब से सुना सूना सा है घर.

(चाची ने मेरे पैजामे में बने तंबू को देख लिया और लज्जा गयी व अपने बूब्स को साड़ी से छिपाने लगी)

मैं- अरे नही चाची, मैं हूँ ना, मुझे तू रमेश ही समझ, जब कभी भी अकेलापन लगे मुझे बुला लिया कर.

चाची- ठीक है बेटा, कभी कभी तू ऐसे ही घर आ जाया कर, मुझे भी साथ मिल जायेगा.

मैं- चाची तू कितनी मोटी है, कितना खाना खाती है?

चाची- हट बदमाश, नज़र मत लगा मुझ पर. तू भी तो कितना तगड़ा है.

मैं- मैं बहुत तगड़ा हूं चाची, तुझे गोद में भी उठा सकता हूँ.

चाची- चल हट झूठा, मुझे कोई नही उठा सकता गोद में, एक बार रमेश ने कोशिस करी थी लेकिन उसकी कमर में ही नस चढ़ गयी.

मैं- अगर मेने उठा लिया तो क्या देगी मुझे इनाम, बता?

चाची- जो तू मांगेगा वो दूंगी.

मैं- सोच समझकर बोल चाची, देना पड़ेगा.

चाची- ऐसी क्या चीज़ है जो इतना सोचना पड़ेगा.

मैं- जो रमेश को बचपन में देती थी तू.

चाची- क्या देती थी बचपन में उसे जो अब नहीं देती हूँ, साफ़ साफ़ बता, कुछ पल्ले ना पड़ा भतीजे.

मैं- अरे चाची दूध की बात कर रहा हूँ.

चाची- हाँ तो दे दूंगी, वो तो मैं रमेश को अभी तक देती हूँ उसमे बचपन में क्या.

मैं- मेरी भोली चाची, शायद तू समझी नहीं, दूध गाय का नहीं, तेरा चाहिए, जैसे रमेश बचपन में चुस चुस कर पीता था.

चाची- ओहो, वो तो अभी तक पीता था मेरा दूध, उसमे क्या है, माँ का दूध तो कभी भी पियो, बच्चे तो बच्चे रहते हैं न, तू भी पी लियो. लेकिन सिर्फ चूसना होगा, इसमें दूध निकलता नही है.

मैं- चाची मैं भी तो रमेश जैसा हूँ, मुझे भी पिलाया कर तू.

चाची- ठीक है ठीक है लेकिन पहले मुझे गोद में उठा कर दिखा तब जानू.

मैं- अभी रुक तू.

(मैने चाची को दोनों हाथों से पकड़ा और एक ही झटके में गोद में उठा लिया, मेरा खड़ा लण्ड चाची के नितम्बो से छू रहा था जो चाची को महसूस हो रहा था, और शर्म से चाची के गाल लाल हो गए और वो गोद से नीचे उतरने की गुजारिश करने लगी, लेकिन मेने चाची को ऐसे ही पकड़े रखा, बड़ा ही मनमोहक दृश्य चल रहा था, अचानक मेरे ठरकी पिताजी खेत पर आ गए और ये अश्लील दृश्य देखकर चौंक गए)

पिताजी- ये सब क्या हो रहा है बेटा, रीता को छोड़ नीचे.

(और फिर चाची ने भी अपना ब्लाउज, साड़ी ठीक करी और शरमाकर-घबराकर घर चली गयी)

पिताजी- ये क्या कर रहा था तू रीता के साथ हरामखोर.

मैं- अरे पिताजी इस जवानी में सहन ना होता अब. तो जरा मजे ले रहा था.

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